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अक्षरों का मंत्र :-
णमो अरिहंताणं, णमो
सिद्धाणं, णमो आइरियाणं |
णमो उवज्झायाणं,
णमो लोए
सव्वसाहूणं ||
16 अक्षरों का
मंत्र :-
अरहंत सिद्ध आइरिया उवज्झाया साहू
6 अक्षरों का मंत्र :-
(1)
अरहन्त सिद्ध
(2) अरहन्त सि सा
(3) ॐ नमः सिद्धेभ्य
(4) नमोऽर्हत्सिद्धेभ्यः
5 अक्षरों का मंत्र :-
अ सि आ उ सा
4 अक्षरों का
मंत्र :-
(1) अरहन्त
(2) अ सि साहू
2 अक्षरों
का मंत्र :-
(1) सिद्ध
(2) ॐ ह्रीं
1 अक्षरों
का मंत्र :-
ॐ (ओम्)
यह ध्वनि पांचो
परमेष्ठी नामों के पहले
अक्षर मिलाने पर बनती है |
यथा अरहन्त का
पहिला अक्षर 'अ',
अशरीरी (सिद्ध) का
'अ', आचार्य का 'आ',
उपाध्याय का
'उ', तथा मुनि
(साधु) का 'म्',
इस प्रकार
अ+अ+आ+उ+म् = ॐ |
(यह 'ओ3म्' इस
प्रकार भी लिखा पाया जाता
है जो कि अशुद्ध है | )
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रत्नत्रय
जाप्य मंत्र :-
ॐ ह्रीं
श्रीसम्यग्दर्शन-ज्ञान-चारित्रेभ्योनमः |
दशलक्षण जाप्य
मंत्र :-
ॐ ह्रीं अर्हन्मुखकमल-समुद्गताय
उत्तम क्षमा धर्मांगाय नमः |
(अथवा)
ॐ ह्रीं उत्तम
क्षमा-धर्मांगाय नमः |
इसी प्रकार 'उत्तम
मार्दव' आदि धर्मों के
मन्त्र जानना चाहिए |
षोडशकारण जाप्य मंत्र :-
ॐ ह्रीं श्री दर्शनविशुद्धि आदि
षोडशकारणेभ्योनमः |
नन्दीश्वर
व्रत (आष्टाह्विक व्रत) जाप्य मंत्र :-
(1) ॐ
ह्रीं नन्दीश्वरसंज्ञाय नमः |
(2) ॐ ह्रीं
अष्टमहाविभूतिसंज्ञायनमः |
(3) ॐ ह्रीं
त्रिलोकसारसंज्ञायनमः |
(4) ॐ ह्रीं
चतुर्मुखसंज्ञायनमः |
(5) ॐ ह्रीं पंच-महालक्षण-संज्ञाय नमः |
(6) ॐ ह्रीं
स्वर्गसोपान-संज्ञाय नमः |
(7) ॐ ह्रीं श्री
सिद्धचक्राय नमः |
(8) ॐ ह्रीं
इन्द्रध्वज-संज्ञाय नमः |
पुष्पांजलि
व्रत जाप्य मंत्र :-
ॐ ह्रीं पंचमेरुसम्बन्धि
अशीति-जिनालयेभ्योनमः |
रोहिणी व्रत
जाप्य मंत्र :-
ॐ ह्रीं श्री वासुपूज्य-जिनेन्द्राय
नमः |
ऋषि-मण्डल
जाप्य मंत्र :-
ॐ ह्रां ह्रिं ह्रुं ह्रुं
ह्रें ह्रैं ह्रौं ह्रः अ
सि आ उ सा सम्यग्दर्शन-
ज्ञान-चारित्रेभ्यो ह्रीं नमः |
सिद्धचक्र-विधान
का जाप्य मंत्र :-
ॐ ह्रीं अर्हं अ सि-आ-उ सा
नमः स्वाहा | |
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त्रैलोक्य
मंडल विधान का जाप्य मंत्र
:-
ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं अनाहत-विद्याधिपाय
त्रैलोक्यनाथाय नमः-
सर्व शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा
लघु शान्ति
मंत्र :-
ॐ ह्रीं अर्हं असिआउसा सर्वशान्तिं कुरु कुरु स्वाहा |
वेदी
प्रतिष्ठा, कलशारोहण, बिम्ब स्थापन जैसे अवसरों का मंत्र :-
ॐ ह्रीं श्री क्लीं अर्हं असिआउसा अनाहत विद्यायै-
अरिहन्ताणं ह्रीं सर्वशान्तिं कुरु कुरु
स्वाहा |
रविव्रत जाप्य
मंत्र :-
ॐ ह्रीं नमो भगवते चिन्तामणि-पार्श्वनाथ
सप्तफण-मंडिताय श्री धरणेन्द्र-पद्मावती-सेविताय
मम ऋद्धिं सिद्धिं वृद्धिं सौख्यं कुरु कुरु
स्वाहा |
रविव्रत लघु
जाप्य मंत्र :-
ॐ ह्रीं अर्हं श्री चिन्तामणि-पार्श्वनाथाय
नमः
मनोरथ सिद्धिदायक मंत्र :-
ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं नमः |
रोगनाशक मंत्र
:-
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कलिकुण्डदण्डस्वामिने नमः
आरोग्य-परमेश्वर्यं कुरु कुरु स्वाहा |
(यह मन्त्र श्री पार्श्वनाथ जी की प्रतिमा
के सामने शुद्ध भाव और
क्रियापूर्वक 108 बार जपना चाहिये | )
मंगलदायक मंत्र :-
ॐ ह्रीं वरे सुवरे असिआउसा नमः स्वाहा |
(एकान्त में प्रतिदिन 108 बार धूप के साथ, शुद्ध
भावपूर्वक जपें | )
ऐश्वर्यदायक मंत्र :-
ॐ ह्रीं असिआउसा नमः स्वाहा |
(सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में मुख करके
प्रतिदिन 108 बार शुद्ध भाव से जपे | )
सर्वसिद्धिदायक मंत्र :-
ॐ ह्रीं क्लीं
श्री अर्हं श्री वृषभनाथ
तीर्थंकराय नमः |
(समस्त कार्यों की सिद्धि हेतु प्रतिदिन
श्रद्धापूर्वक 108 बार जपना चाहिये | )
सर्वग्रह शान्ति मंत्र :-
ॐ ह्रां ह्रीं
ह्रूं ह्रौं ह्रः असिआउसा
सर्व-शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा |
(प्रातः काल जप करें)
रोग निवारक मंत्र :-
ॐ ह्रीं सकल-रोगहराय
श्री सन्मति देवाय नमः |
शान्तिकारक मंत्र :-
ॐ ह्रीं परमशान्ति विधायक श्री शान्तिनाथाय नमः |
अथवा
ॐ ह्रीं श्री अनंतानंत परमसिद्धेभ्यो नमः |
घंटाकर्ण
मंत्र :-
ॐ ह्रीं घंटाकर्णो महावीर,
सर्वव्याधि-विनाशकः |
विस्फोटकभयं
प्राप्ते, रक्ष
रक्ष महाबलः |1|
यत्र त्वं
तिष्ठसे देव,
लिखितोऽक्षर-पंक्तिभिः |
रोगास्तत्र
प्रणश्यन्ति, वात-पित्त-कफोद्भवाः |2|
तत्र राजभयं नास्ति, यन्ति कर्णे
जपात्क्षयम् |
शाकिनी भूत वेताला,
राक्षसाः प्रभवन्ति न |3|
नाकाले मरणं
तस्य, न च सर्पेण दंश्यते |
अग्निचौरभयं
नास्ति, ॐ
श्रीं घंटाकर्ण !
नमोस्तु ते ! ॐ नर
वीर ! ठः ठः ठः स्वाहा ||
(इस मंत्र का 21 बार जप
करने से राज-भय, चोर-भय,
अग्नि और सर्प - भय, सब
प्रकार की भूत - प्रेत - बाधा
दूर होतें हैं | सर्व विपत्ति-हर्ता मंत्र है | )
लक्ष्मी प्राप्ति एवं मनोकामनापूर्ण करने
का मंत्र :-
(प्रातःकाल 1 माला)
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं अर्हं श्री अ सि आ
उ सा नमः | |
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नवग्रह
शान्ति के लिए जाप्य मंत्र :-
सूर्य के लिए
: ॐ णमो सिद्धाणं |
(10 हजार) चन्द्र के लिए
: ॐ णमो अरिहंताण |
(10 हजार) मंगल के लिए
: ॐ णमो सिद्धाणं |
(10 हजार) बुध के लिए
: ॐ णमो उवज्झायाण |
(10 हजार) (गुरु) वृहस्पति
: ॐ णमो आइरियाणं |
(10 हजार) शुक्र के लिए
: ॐ णमो
अरिहंताणं |
(10 हजार) शनि के लिए
: ॐ णमो लोए सव्व साहूणं | (10 हजार)
केतु के लिए
: ॐ णमो सिद्धाणं |
(10 हजार)
राहू के लिए
: ॐ णमो अरिहंताणं,
ॐ णमो सिद्धाणं,
ॐ णमो आइरियाणं, ॐ णमो उवज्झायाण
ॐ णमो लोए सव्व साहूणं, (10 हजार)
पापभक्षिणी
विद्यारुप मंत्र :-
ॐ अर्हन्मुख-कमलवासिनीपापात्म-क्षयंकरि, श्रुतज्ञान-
ज्वाला-सहस्र प्रज्ज्वलिते-सरस्वति मम पापं हन हन,
दह दह, क्षां क्षीं क्षूं क्षौं क्षः क्षीरवर-धवले अमृत-संभवे
वं वं हूं हूं स्वाहा |
(इस मंत्र के जप के प्रभाव से साधक का चित्त
प्रसन्नता धारण करता पाप
नष्ट हो जाते हैं, और
आत्मा में पवित्र भावनाओं का संचार होता हैं | )
महामृत्युंजय मन्त्र :-
ॐ ह्रां णमो अरिहंताणं | ॐ ह्रीं णमो
सिद्धाणं, ॐ ह्रूं णमो आइरियाणं,
ॐ ह्रौं णमो
उवज्झायाणं, ॐ ह्रः
णमो लोए सव्वसाहूणं,
मम सर्व -
ग्रहारिष्टान्
निवारय निवारय
अपमृत्युं घातय
घातय सर्वशान्तिं
कुरु कुरु स्वाहा |
(विधि दीप जलाकर धूप
देते हुए नैष्ठिक रहकर इस
मंत्र का स्वयं जाप
करें या अन्य
द्वारा करावें |
यदि अन्य व्यक्ति
जाप करे तो 'मम'
के स्थान पर उस व्यक्ति का नाम
जोड़ लें जिसके लिए जाप
करना है | ) इस मंत्र का सवा लाख जाप
करने से ग्रह-बाधा
दूर हो जाती है | कम
से कम इस मंत्र का 31
हजार जाप करना
चाहिये | जाप के अनन्तर
दशांश आहुति देकर हवन भी करें |
शान्ति मंत्र जाप्य विधि
जहाँ 1 है वहां णमो अरिहन्ताणं, जहाँ 2 है
वहां णमो सिद्धाणं, जहां 3 है
वहां णमो आइरियाणं, जहाँ 4
है वहां णमो उवज्झायाणं, जहां 5 है वहां
णमो लोए सव्व साहूणं पढ़ना चाहिए |

प्रतिदिन कम
से कम 21 बार
जाप्य अवश्य कर लेना चाहिए | यह जाप्य परम मांगलिक और शान्ति का देने वाला है | |
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( मंत्रों
का जाप को करते समय स्वच्छता का विशेष
ध्यान रखना चाहिये | )
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(Hindi Version) |
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