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हिन्दू धर्म के
वेदों में भगवान का
स्वरूप ॐ अक्षर ही है।
गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं,
सम्पूर्ण वेदों में प्रणव ओंकार
मैं ही हूं। भगवद्गीता
में ओम शब्द के कई अर्थ
हैं। इसे अएम, उदगीथ,
एकाक्षर मंत्र, ओंकार,
नादब्रम्ह, पंचवर्ण,
परमाक्षर, प्रणव, ब्रम्हाक्षर,
वेदादि, शब्दब्रम्ह,
शब्दाक्षर, स्वर ब्रम्ह भी कहते
है।
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